उनका असाधारण अवकाश पर जाना


वह  नाराज़ हैं । उनकी इस नारजगी पर  पार्टी हैरान है । वह ‘यह ले अपनी लकुटी कमरिया’ जैसा कुछ कह कर अपने कुरते की बाजू लपेटते हुए छुट्टी मनाने विदेश निकल  गए हैं । वह जब खुश होते हैं तब यूरोप की यात्रा पर जाते हैं । जब ऊबते हैं तब अमरीका तक  टहल आते हैं । मुल्क में गर्मी पड़ती है तो वह बर्फबारी देखने स्विट्जरलैंड चले जाते हैं । पार्टी की हार पर मन अवसाद से घिरता है तो हवा पानी बदलने थाईलैंड और खुश होते हैं तो सांबा नृत्य देखने ब्राजील हो  आते हैं । अपने मुल्क में तो कभी कभार पार्टीजनों की हौंसलाअफजाई और देशहित के लिए आते हैं ।  अबकी वह बार जरा गुस्से में हैं तो हो सकता है कि सीरिया में आईएसआईएस के लड़ाकों के कैम्प में  अपने भीतर रोमांच भरने चले जाएँ ।
वह  स्वभावतः यायावर हैं एकदम खोजी  यात्री क्रिस्टोफर कोलम्बस की तरह  के निरंतर घूमते रहना  उनका प्रिय शगल  है उनके जितना विश्वाटन शायद ही कोई कर पाया  हो वह घूम घूम कर दुनिया को देखते परखते रहते हैं उनकी प्रेरणा से ही उनकी पार्टी की घड़ी  विपरीत दिशा में द्रुतगति से घूम रही है पार्टी निरंतर गतिमान है और चलते चलते आधुनिक इतिहास की पन्नों  को लांघ प्रागैतिहासिक बनने की ओर अग्रसर है 
इस बार वह बजट सत्र को छोड़ कैजुअल टाइप की किसी लीव पर नहीं गए हैं । वह इतनी डाउन मार्केट छुट्टी पर जा भी कैसे सकते हैं ?  सीएल ,ईएल ,एमएल ,फ़ोर्स लीव आदि पर आम कर्मचारी  प्राय: जाते रहते  हैं । फरलो नाम की वेकेशन पाने के लिए सेलिब्रिटी सजायाफ्ता होना जरूरी होता है । वैसे कभी -कभी अधिकारी और मालिक लोग अपने कारिंदों की यूँही खड़े -खड़े छुट्टी कर देते हैं । वह तो इस बार सेबेटिकल विश्राम पर गए हैं । श्लाघा पुरुष सदा जो काम करते हैं वह  अभूतपूर्व होता है । वह छुट्टी पर जाते हुए भी इतिहास रच देते हैं । वह असाधारण अवकाश  पर गए है ,जिसका  हवाला बहुत ढूँढने के बाद सिर्फ कुछ  प्राचीन ग्रीक ग्रंथों और बाइबिल में मिलता है । यह वह समय था  जब ईश्वर ने ब्रह्माण्ड को प्रलय के बाद नए सिरे से रचने के बाद सुस्ताने के लिए लांग लीव पर जाना तय किया था ।
उन्होंने किसी  ब्रह्माण्ड की संरचना जैसा कोई काम तो   नहीं किया है लेकिन धरती पर जमी जमाई अपनी पार्टी की जड़े कुरेद कर और उसकी शाखों की कतर ब्योंत (प्रूनिंग) करके उसे मनभावन बोनसाई जरूर बना दिया है । वटवृक्ष को गमले में सजने लायक बनाना कोई आसान काम नहीं होता । यह एक बेहद श्रमसाध्य कला है । इसे कला को साधते साधते वह थक गए हैं । उन्हें  प्रभु की तरह थकन से उखड़ी हुई सांसों को स्थिर के लिए सुकून के कुछ विदेशी पल चाहियें ।
वह विदेश की ओर कूच करने से पहले पार्टीजनों से कह गए हैं कि वे यहाँ रह कर बजट प्रावधानों पर पुरजोर बहस आदि करने का अपना काम बदस्तूर जारी रखें । समय समय पर संसद में शोरोगुल करते रहें ।  मौका मिलने पर धरना प्रदर्शन आदि करते रहें । वित्त मंत्री के बजट भाषण के दौरान एक दशक पुरानी मेज थपथपाने की आदत को त्याग कर  लगातार टोकाटाकी और नारेबाजी करते रहें ।  लोगों को लगना चाहिए कि बिना नेता के भी विपक्ष को अपना काम करना आता है । उनके सामने तो अन्य दूरगामी लक्ष्य हैं । उनके पास बजट -वजट में खुद को  उलझाने के लिए फ़िलहाल कतई फुरसत नहीं है ।



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