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May, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दिल्ली एक सरकारें दो

सरकारों के सामने हमेशा यह समस्या रही है कि वे काम तो खूब करतीहैं लेकिन उसका सम्यक प्रदर्शन नहीं कर पातीं।मेधावी बच्चे परीक्षा में इसलिए फेल कर दिए जाते हैं कि वे एक्जामिनेशन के वक्त अपने ज्ञान को उत्तर पुस्तिका पर ठीक से धर नहीं कर पाते।इस उल्टे- पुल्टे समय में खाने पचाने से अधिक उसे दिखाने का अधिक महत्व है।यह राजनीतिक मामला नहीं ,विशुद्ध संवाद दक्षता से जुड़ा सवाल  है।मानना होगा कि वर्तमान में सरकार अपनी उपलब्धियों को विज्ञापित करने  में कामयाब है।वह शून्य में से सफ़ेद कबूतर और खाली टोपी में से खरगोश निकाल कर दिखा देने की कला जानती है।अबकी बार जादू भरी सरकार है। सरकारों के सामने सदा - सदा से संवाद के प्रकटीकरण की समस्या रही है।इस समय दिल्ली में दो –दो संवाद प्रवीण सरकारें  हैं।एक कामधाम करने से अधिक लड़ने- झगड़ने में इस कदर तल्लीन है कि उसके पास किसी को देखने दिखाने के लिए फुरसत नहीं है।दूसरी ने किया कुछ खासनहीं लेकिन उसके पास बिना कुछकिये उसेदिखाने की अभूतपूर्व स्किलहै।एक के हाथ में झाड़ू और सबको लतियाने की बेचैनी है तो दूसरे के पास हर मर्ज का इलाज करने वाली सेल्फीहै।कहना न होगा कि दोनों …

चलो अच्छा हुआ जो गर्मी आ गई

लो आ गई गर्मी।जबकि लग यह रहा था कि इस बार यह आएगी नहीं।सर्दी के मौसम के बाद डायरेक्ट बरसात आजायेगी।गर्मी नेताई आश्वासनों की तरह आते -आते अपना आगमन स्थगित कर देगी।हालाँकि इस बात पर कुछेक घनघोर आशावादियों के सिवा किसी को यकीन नहीं था।बर्फ की चुस्की बेचने वाले से लेकर एसी बनाने वाली कम्पनी के सीईओ तक और कूलर की पैडिंग घास बेचने वाले का धंधा करने वाले से लेकर आइसक्रीम पार्लर के सेल्समैन तकसबको पता था कि गर्मी यदि यहाँ नहीं आएगी तो जायेगी कहाँ।उसे तो हर हाल में आना ही होगा। मौसम कोई भी हो कभी स्थिर नहीं रहता।एक आता तो दूसरा जाता है।ठीक वैसे ही जैसे लोकतंत्र में एक सरकार आती तो दूसरी जाती है।कभी कभार एक सरकार चली जाती है पर उसका स्थान लेने में दूसरी सरकार ठिठक जाती है।ऐसे में हॉर्स ट्रेडिंग वालों की बन आती है।छंटे हुए प्रतिनिधि तब घोड़ों में तब्दील हो जाते हैं।उनमें से कु

सेल्फी है तो कमाल है

सेल्फी का जमाना है। दुनिया भर में सेल्फी के चर्चे हैं।यह हर जगह है ।जिराफ की तरह गर्दन को उचका कर ,मुहँ को बंदर की तरह बिचका कर और सोशल मीडिया पर उसे चिपका कर कोई भी रातोरात अपनी छवि और स्टेट्स को वायरल कर सकता है।पेट्रोल या डीजल के दाम बढ़ें तो आप उसे अपने वाहन में भरवाते हुए सेल्फी खींच कर सबको बता सकते हैं कि दाम बढ़ें या घटें ,इससे हमें क्या ? वी मीन बिजनस। सेल्फी की संभावना हर जगह मौजूद रहती है।जब उसे खींचने का मौका नहीं मिलता तब वह हमारी स्मृति में रहती है ।अत्यंत सेल्फ्लैस तरीके से रहती है ।अपना हाथ जगन्नाथ टाइप के मोड में रहती है ।इसके लिए किसी अन्य की न तो चाहत होती है ,न  दरकार ।यह देह और आत्मा को एकाकार कर देती है ।यह हर जरूरी गैर -जरूरी पल को संजो लेती है ।इतिहास के बनने की प्रक्रिया की सूक्ष्म डिटेल्स तक को हाथ से फिसलने नहीं देती।डिजिटल इमेज तुरत फुरत वैश्विक लोकप्रियता दिला  जाती है ।राजनय के असल मुद्दे सेल्फी के सामने टिक नहीं पाते ।विदेशी मामलों के प्रकाण्ड पंडित  इस सेल्फी डिप्लोमेसी के सामने हतप्रभ रह जाते हैं। सेल्फी खींचना एक कला है।इसकी टाइमिंग को साधना आसान नहीं। गि…

झपकी क्यों खटकी ?

एक आधुनिक तानाशाह राजा ने अपने दरबारी मंत्री को इसलिए तोप से उड़वा दिया क्योंकि वह दिन के समय अपने कार्यालय में बैठा हुआ खुल्लमखुल्ला झपकी ले रहा था । पता लगा है कि वह सिर्फ इतना ही नहीं कर रहा था वरन सपने देखने की कोशिश भी कर रहा था । नींद को तो फिर भी बर्दाश्त किया जा सकता है लेकिन सपने देखना तो कतई कदाचार है । कदाचार से भी बढ़ कर शतप्रतिशत राजद्रोह । ऐसे में उसे वही दण्ड मिला जिसका वह पात्र था । राजे महाराजे इनाम इकराम पद ओहदे और सजा देने में कभी कृपणता नहीं बरतते । इतिहास इस प्रकार की ‘दरियादिली’ को सदियों तक याद रखता है । वह शाबाशी आदि को तो दर्ज करने में भले ही चूक जाये पर सख्त किस्म की न्यायप्रियता को स्वर्णिम अक्षरों में संजो कर रखता है ।
यह बात सबको ठीक से पता रहनी चाहिए कि गहरी नींद में बांसुरी बजाने और सपने देखने का काम राजसी होता है और इसका विशेषाधिकार सिर्फ राजा टाइप लोगों के पास सुरक्षित रहता है । प्रत्येक राजा के भीतर कमोबेश नीरो नाम का निष्णात बांसुरीवादक रहता है । जनता का सम्यक कर्तव्य है कि वे अपने राजा के स्वप्न साकार करने के लिए चौबीस पहर जागती रहे । अपने उद्यम में व्…

जेल ,बेल ,खेल और डकवर्ड लुईस मैथड

उस दिन वही खबर आई जो आनी थी।सेलिब्रिटीज की निजी जिन्दगी में अनचाहे ट्विस्ट अमूमन नहीं आते।सब कुछ बहुत करीने से होता है।पूरे जोर -शोर से होता है ।तयशुदा कार्यक्रम के तहत होता है ।स्पीड के साथ होता है ।जेल होती है तो हाथों -हाथ बेल हो जाती है ।सब कुछ इतनी जल्दी होता है कि जितनी तेजी से  फुटपाथियों को हिट करके कोई   रेस भी नहीं लगा पाये । इतनी  तुरत -फुरत तो  पिक्चर का टिकट ब्लैक मार्केट में भी  नहीं मिले ।इतनी शीघ्रता से चाटवाला गोलगप्पे  में  सुराख़ कर जलजीरा भी नहीं उड़ेल पाये  । इस फुर्ती से  अनुभवी शोहदा खूबसूरत लडकी को देखने के बाद बायीं आँख का कोना ठीक से नहीं दबा पाये  । इतनी कम अवधि में आम आदमी को अदालत परिसर में  बनी फोटोस्टेट की दुकान का अतापता भी नहीं मिले  । सेलिब्रिटीज के लिए सब कुछ आननफानन में हो जाता है । उनकी सुपरमैन की रुपहली छवि के चलते न्याय क्या कोई भी प्रक्रिया एकदम तरल हो जाती है ।चारों ओर से एक ही आवाज आती है –भाई टेंशन नहीं लेने का ।हम लोग हैं न ! सेलिब्रिटी के साथ ज़माना रहता है। वह अपने से जुड़े हर मामले को सेलिब्रेशन की गुंजाइश  ढूंढ लेते हैं  ।वह अदालत जाता है तो ट…

आओ चलो भूकम्प मनाएं

भूकम्प फिर आया ।ठीक उसी तरह से आया जैसे अनचाहा मेहमान बस अड्डे पर जाकर उपयुक्त बस न मिल पाने की आड़ में  लौट आता है ।गया हुआ मेहमान जब फिर -फिर लौटता है तो बड़ा खलता है । सबको पता है कि मेहमान और मछली तीसरे दिन गंधाने लगते हैं । पर क्या किया जाये जब मेहमान को झेलना मजबूरी बन जाये तो कहना पड़ता है कि चलो भूकम्प को इवेंट बनायें ।सब मिल कर भूकम्प - भूकम्प मनायें ।बेबसी जब दर्शनीय बना जाती है तो उसके जरिये हमारी सदाशयता का पुनर्पाठ होता है । मजबूरी में फंसा आदमी बड़ा काव्यमय और दार्शनिक हो जाता है । भूकम्प आया तो हमारे भीतर की दयालुता को जाग  उठी  ।अब अवसर है कि  घर के कबाड़ को इमदाद के रूप में बांटा जाये । पराई आपदाओं को जमकर सेलिब्रेट किया जाये ।अवसर मिले तो तबाही के मंजर को ढंग से महसूस किया जाये ।भयग्रस्त लोगों के क्लोजअप खींच कर सोशल मीडिया की दीवार पर ‘फीलिंग सेड’ के हैश के साथ चिपकाया जाये ।आवाम को पता लगना चाहिए की बंदा किस कदर संवेदनशील है कि गमगीन होने का सलीका जानता है । अबकी बार भूकम्प समर वेकेशन में आया है ।निठल्ले स्कूली  बच्चों के लिए मुफ्त में मिलने वाले मनरोंजन की तरह ।वे भरी दो…

ऊपरवाले का अम्मा दिवस

अम्मा को ऊपर वाले ने आज़ाद कर दिया । अब यह  कन्फर्म हो गया   कि वह  बड़ा कृपालु है ।उसके यहाँ देर तो है पर अंधेर बिलकुल नहीं । उसके यहाँ न्याय का लट्टू फ्यूज उड़ जाने के बाद भी रसूख के इन्वर्टर  से जगमगाता रहता है ।जब किसी  भक्त पर आपदा आती  है तब वह द्रुतगति कार्यवाही करता है ।उसके काम करने का अंदाज़  कुछ ऐसा है जैसे किसी दफ्तर के बाबू की नथुनों  में अच्छे समय की आहट पाकर  दफ्तरों की संबंधित फ़ाइल हिरन की तरह एक मेज से दूसरी मेज पर  लांघती कुलांचे भरने लगती है । ऊपर वाले की माया अपरम्पार है ।उसकी मर्जी पर कोई सवालिया निशान नहीं लगा सकता ।वह तुरत फुरत दूध का दूध और पानी का पानी कर देता है ।जिसका एक मतलब यह भी है कि उसके पास अत्याधुनिक मिल्क सेपरेटर होता है जो  दूध में से क्रीम पलक झपकते निकाल लेता है और पर दूध फिर भी बरकरार  रहता है ।उसे पता है कि इहलोक में जिसको जो मिलता है उसके प्रारब्ध के अनुसार मिलता है ।क्रीमी लेयर वालों को  उत्तम क्वालिटी की क्रीम मिलती है । अम्मा पर ऊपरवाले ने रहम करके नीचे वालों पर महती अनुकम्पा की ।वह जेल जातीं तो उनके गम में न जाने कितने भावावेश के चलते  असमय काल …

एकदम मौलिक शोक सन्देश

वह शोकाकुल थे l भूकम्प से हुई जान और माल की हानि का जायजा लेने के लिए वहाँ पहुंचे थे l उन्होंने वहां घूम घूम कर बरबादी को नजदीक से देखा l प्राकृतिक आपदा के खिलाफ उन्हें कुछ लिखना था l शोक पुस्तिका में लिखने के लिए उन्होंने अपनी अक्ल पर जोर दिया l बात बनती हुई दिखाई नहीं दी तो उन्होंने और जोर लगाया l खूब जोर लगाने से अकसर बड़े- बड़े  काम निबट जाते हैं l पर इस जोर लगाने का असर यह हुआ कि शोक सन्देश वाली इबारत तो नदारद रही अलबत्ता कहीं दूर से भैंस के रम्भाने की आवाज़ आती जरूर सुनाई पड़ी l वह तुरंत समझ गए कि भैंस अपने को अक्ल के मामले अधिक स्ट्रीट स्मार्ट समझ रही  है  l वह समझ में नहीं पा रहे थे  कि शोक की इस घड़ी में क्या लिखें l उन्होंने अपने मोबाइल में ‘क्लू’ मिलने की आस में झाँका तो उन्हें  स्क्रीन पर योयो हनीसिंह मटक मटक बड़ी द्रुत गति से गा रहे थे l वह गा रहे थे ,यह तो ठीक ,पर क्या गा रहे थे यह  समझ नहीं आया  l -ओय ,हनी सिंह ठीक से गा l तेरी बात समझ में आये तो कुछ लिखूं l उन्होंने कहाl पर बात बनी नहीं l योयो यूँही गाता रहा l उनकी समझ में आया कि ये योयो इसीलिए पॉपुलर  है क्योंकि इसकी बात किसी…

एक्टर को मिली सजा के आजू –बाजू

जेल जाना किसी के बड़ा कलाकार होने की सही शिनाख्त होती है ।जेल जाता हुआ एक्टर उदारमना हो जाता है ।उसकी पलकें बार बार भीग जाती हैं ।फैसला आते ही उसकी दबंगई काफूर हो जाती है ।वह बडबडाता है कि इस मुकदमे से हमारे भीतर इतने छेद हो गए  कि समझ में नहीं  आ रहा कि हम किस छेद से जेल को निहारें और किससे वकील और जज  की ओर जमानत के लिए उम्मीद से देखें  ।इस कन्फ्यूजन के समय में वह महामानव और आम आदमी के बीच लगातार आवाजाही करता हुआ बड़ा दयनीय लगता  है ।उसकी सिक्स पैक वाली देह यकायक ढीली पड़ जाती है । नामवर एक्टर सिर्फ आदमी भर नहीं होता वह अरबों रुपये का चलता फिरता व्यवसाय होता है ।रुपहले परदे पर उसकी हर अदा और डायलॉग डिलीवरी पर जनता झूम -झूम जाती है ।वह नाचता है तो करोड़ों लोगों के पाँव थिरकने लगते हैं ।।वह विलेन को पीटता है तो जनता को लगता है कि देश -दुनिया की समस्त बुराईयों की ढंग से धुलाई हो रही है ।वह कोल्डड्रिंक की बोतल का ढक्कन भर खोलता है तो अपनी -अपनी ऊब में सिमटे हुए लोगों को जिंदगी में नयनाभिराम तूफ़ान के आने की प्रतीति होती है । फैसला आ गया है ।मसखरे नेपथ्य में सदियों पुराना  बाल -गीत पूरे सुर ताल…