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January, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

तुला में फुदकता मतवाद

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अमुक जी आजकल कहाँ हैं?यह एक ऐसा सवाल है जो समय समय पर किसी न किसी बहाने उठता या उठाया जाता रहा है। वास्तव में यह अमुक जी और कुछ नहीं रिक्त स्थान पर लगे डाॅट है। रिक्त स्थान पूर्ति के लिए छोड़ दी गयी खाली जगह।एसएमएस की शैली में कहा और समझा जाए तो स्पेस।जब हम खुद को समझने में निर्णायक रूप से पराजित हो जाते हैं तब दूसरों की जिन्दगी का अतापता पूछना शुरू करते हैं।यह पूछताछ ऐसी ही है जैसे कोई नकटा दूसरों की नाक की कुशलक्षेम जानने के बहाने कुतरी हुई नाक के विषय में जानकर तसल्ली पाए।  अमुक जी के बारे में जानना इतना सरल भी नहीं होता पर खोज पड़ताल की जाए तो उनका पता लगा लेना इतना कठिन भी नहीं ।मैंने फोटो फ्रेम करने वाले मुसद्दी लाल जी से दरयाफ्त की तो उन्होंने बताया कि वह अभी दो चार दिन पहले लोहिया जी की तस्वीर मढ़वाते हुए दुकान पर बरामद हुए थे।इससे पहले बाबा जी का लेमिनेट किया चित्र ले गये थे।इसके बाद उस भगवाधारी बाबाजी को कोट पेंट वाले बाबा साहब से बदल कर ले गये थे।एक दिन अन्ना का आदमकद चित्र ढूंढते हुए आये थे जब वह उन्हें नहीं मिला तो बन्दर नचाते मदारी का फोटो यह कह कर ले गये कि यह भी ठीक है।इससे…

जलीकट्टू और सिर पर उगे नुकीले सींग

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अढाई हज़ार साल से हम जलीकट्टू खेलते हुए मरखने बैलों को साध रहे हैं।सैकड़ों बरसों से हम एक दूसरे के कंधे पर पाँव रख कर दही की हांडी चकनाचूर कर रहे हैं।गत अनेक दशकों से हम अपने बच्चों को भविष्य के लिए प्रशिक्षित करने के नाम पर तोते जैसी रटंत विद्या में प्रवीण बना रहे हैं।वर्तमान में हम अतीत के चोटिल परन्तु महिमामंडित संस्कृति में संतति के लिए गोलमटोल ‘पे पैकेज’ टटोल रहे हैं।बदलते वक्त के साथ हम खुद को लेशमात्र बदलने को तैयार नहीं।गंदगी से बजबजाती नालियों को हम इसलिए साफ़ करने को तैयार नहीं क्योंकि स्वच्छता से हमारी युगीन असहमति रही है।जीवन मूल्य तेजी से उल्ट पलट हो रहे हैं लेकिन हम अपनी परम्पराओं के वैभव के समर्थन में डटे हैं।हमारे सिरों पर नुकीले सींग उग आये हैं।
बैल के सींग पर लटके सोने चांदी के सिक्के पाने या लूटने पर हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। लूटपाट ही हमारी महत्वकांक्षा है।आकाश में लटकी हांडियों को फोड़ कर उसमें रखे द्रव्य को पाने की वीरता सर्वकालिक है। लेकिन इसमें जोखिम है।सबको पता है कि नो रिस्क ,नो गेम।जिस काम में रिस्क फैक्टर न हो वह तो घर की चौखट पर बैठकर लडकियों द्वारा खेले जाने …