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April, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वह इस तरह क्यों मरा ? ,,,,

आप वाले परेशान हैं l राजस्थान का किसान दिल्ली के पेड़ से सरेआम लटक कर मर गया l लोग मरने के लिए कैसी कैसी जगह और वजह ढूंढ लेते हैं l नेताओं को शक है कि यह मरने वाला और चाहे जो हो किसान तो नहीं रहा होगा l और यदि किसान होगा भी तो गरीब गुरबा नहीं होगा l एक पीड़ित शोषित आदमी के पास इस तरह मरने की फुरसत कहाँ ? वह तो अपने घर द्वारे बैठ कर मुआवजे की बाट जोहता है l मदद के लिए पटवारी से लेकर अफसर तक और ग्राम प्रधान से लेकर जिला स्तरीय नेता तक सभी के पीछे पीछे चिरौरी करता घूमता है l वह तिल -तिल कर मरता है लेकिन इस तरह अपने प्राण नहीं त्यागता l वह मरते दम तक अपनी औकात याद रखता है और जब मरना अपरिहार्य हो जाता है तो चुपचाप मर जाता है l
आप वालों को उसके इस तरह मरने में बड़ी साजिश की बू आ रही है l अन्य दलों के नेताओं को इसमें अपने लिए मौके ही मौके दिखाई दे रहे हैं l किसान की जब फसल बरबाद होती है तब राजनीतिक जमीन पर उम्मीदों की फसल लहलहाती है l सपने जब धाराशाही होते हैं तब गिद्धों के लिए महाभोज का इंतजाम होता है l वह अन्नदाता है इसलिए उसे अपने लिए कुछ मांगने का अधिकार नहीं है l यह मुल्क कृषिप्रधान देश है …

रैली ,बैंकाक ,सेबिटिकल और लंतरानी

रैली हो गई । रैली होनी ही थी । रैलियां होती रहती हैं । रैली में भीड़ थी । गहमागहमी थी । किसानों की जमीन से अधिक अपनी राजनीतिक जमीन को फिर पा लेने का उतावलापन था । गुलाबी पगड़ी थीं । सोमरस की महकके साथ पसीने की गमक थी । मंचासीन लोगों को अपना चेहरा दिखाने की सनातन उत्सुकता थी । मौसम गर्म था । ठंडाये नेताओं में जोश था । उनके भीतर का अवसाद पिघलता हुआ लग रहा था । उनकी बॉडी लेंग्वेज में उचाट मन के रूपांतरण की गाथा लिखी दिख रही थी । मीडिया के रणबांकुरे ओवरबिजी दिख रहे थे । वे रैली स्थल के जर्रे जर्रे से लगातार पूछ रहे थे कि अब वे कैसा महसूस कर रहे हैं । रैली के लिए मंच सजा था । उसे खूब ऊँचा बनाया गया था । यह बात कन्फर्म नहीं है लेकिन भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि मंच के नीचे फोम के मोटे गद्दे बिछाए गए थे ताकि भावातिरेक में  कोई नेता कुरते की बांह  चढ़ाता वहां से छलांग लगा भी देतो चोटिल न हो ।  पार्टी और नेता की रिलाउन्चिंग के समय ऐसी -वैसी हर बात का ख्याल रखना ही पड़ता है । तिस पर इस बार तो विपश्यना से प्राप्त होश और थाईलैंड प्रवास से प्रवास से प्राप्त अतिरिक्तजोश की साख  इसी मंच पर दांव पर लगी थी …

वह आ गए हैं

वह आ गए हैं l  यदि पुराना समय होता तो राजमहल के दमकते फर्श पर सच्चे शफ्फाक  मोती फुदक रहे होते l  मध्यकाल में जब हिज हाईनेस अकबर को दासी ने राजकुंवर के आगमन की  खबर दी थी तो उन्होंने खुश होकर अपने गले में पहनी मोतियों की बेशकीमती माला तोड़ कर उसकी झोली में डाल दी थी l  तब कुछ मोती फर्श पर जा गिरे थे और देर तक क्रेजी बाॅल की तरह उछलते हुए ऐतिहासिक गल्प का हिस्सा बन गए थे l   राजसी फिजूलखर्ची का यह किस्सा आज तक खूब मजे लेकर सुना और सुनाया जाता है l  वह आये हैं तो आसमान में बेमौसम बादल आ गए हैं l  ढोल नगाड़े वालों ने आने में देर की तो बादल खुदबखुद गड़ागड़ा उठे l  बधाइयाँ गाने की तैयारी चल रही है l  बधाई गान की स्क्रिप्ट आलाकमान के अप्रूवल के लिए भेजी गई है l  इस बार हर काम बड़े करीने से किया जाना तय हुआ है l  वह सत्य से साक्षात्कार करके आये हैं l  अब पार्टी के भीतर -बाहर जो  घटित होगा सच के आलोक में देख -परख के होगा l  इस बार कोई चूक न हो ,इसका पूरा ख्याल रखा जायेगा l  पार्टी के कारिंदों से कह दिया गया है कि वे इतनी तालियाँ बजाएं कि उनके हथेली लाल सुर्ख हो जाये ताकि जनता को पता लगे कि हाथ वाल…

मुआवजे का सीजन

मौसम की उलटबांसी ने किसानों के लिए बुरे दिन ला दिए l  असमय बारिश और ओलों ने खड़ी फसल बरबाद कर दी l  राजनीतिक लोगों के लिए मुरादों भरे दिन आ गए  l  गांव गांव मुआवजा बाँटने और बंटवाने का खेल शुरू हो गया l  तमाम जाँच पड़ताल के बाद जब मुआवजे की रकम चैक की शक्ल में आई तो लुटे पिटे किसानों की समझ में यह नहीं आ रहा  कि इतनी कम धनराशि से वे मरने के लिए कौन सा सामान खरीदें l   इतनी कम  धनराशि से  आत्महत्या  के लिए उपयुक्त रस्सी या समुचित मात्रा में जहरभरी  पुड़िया तो मिलने से रही ! मुआवजा बंटने की भनक मिलते ही ब्लॉक से लेकर तहसील कार्यालय तक  बहार छा गई  l  तजुर्बेकार सरकारी कारिंदों और नेताओं ने आसमान से ओले की पहली खेप के धरती पर बरसते ही समझ लिया था कि अब उनका   ‘सीजन’ आने वाला है l  दार्शनिक सच भी यही है कि जब किसी को कुछ गुम होता  है तभी किसी दूसरे को कुछ मिलता है l  ठसाठस भरी बस में से जब एक सवारी उतरती है तो डंडा थामे जैसे तैसे एक पाँव पर खड़ा पैसिंजर बैठने का मौका पाता है l  मुआवजा ,पेंशन ,अनुग्रह राशि  जब वितरित होने लगती  है तब सुविधा शुल्क के रूप में रिश्वत से लोगों की मुट्ठियाँ गर्माने …

वह आ रहे है

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कुछ दिनों पहले उनकी उपस्थिति की थाह पाने के लिए लोगों ने आकाश-पाताल एक कर दिया था। अति उत्साही गोपीचंदों ने उनके घर से लेकर पार्टी दफ्तर के कोने-कोने की खाक छानी, पोगो के कैरेक्टर, भूमि अधिग्रहण संबंधी दस्तावेजों से लेकर उनके बेड के गद्दे के नीचे मिली चॉकलेट की पन्नियों तक में बारीकी से तलाशा था उन्हें।

वह सत्य की तलाश में थे, और यह बात सबको पता है कि सच गहमा गहमी से भरी रोजमर्रा की चीजों के बीच कहां मिलता है। सच तो सदियों से ही सघन अरण्यों में, कंदराओं के भीतर, वटवृक्ष की छाया में आराम फरमाता मिला है। आज तक किसी को यह मेट्रो ट्रेन की सीट पर लावारिस रखा हुआ या किसी धन्ना सेठ की जैकेट के जेब के ब…

स्टिंग और हिडन कैमरा

‘सुनो जी हमारे मोबाइल में भी स्टिंग एक्टिवेट करवा दीजिए’ मैडम जी की चाशनी में डूबी आवाज़ मेरे  एक कान में आई तो मेरे  दोनों कान ताज्जुब से फडफडा उठे l  अचरज में  भर कर मैंने केलेण्डर की ओर देखा l आज न मैरिज एनिवर्सरी थी  और न वैलेंटाइन डे जैसा कुछ होने का कोई सबूत l हमने उनके इस अनुरोध के जवाब में कहा –हम्म l  इस ढाई आखर के ‘हम्म’ से आई बला टल जाती है l -हम्म नहीं ,हाँ जी कहो l मुझे हर हाल में स्टिंग करने वाला एप चाहिए l उनकी आवाज़ में मौजूद  तल्खी से मुझे तुरंत पता चल गया कि बला अभी टली नहीं है l -तुम्हें किसका  स्टिंग करने की जरूरत आ पड़ी सुबह -सुबह ? मैंने यूँही पूछ लिया l -इससे तुम्हें क्या ? मैं जी चाहे जिसका स्टिंग करूँ ,मेरी मर्जी ? मैडम जी के भीतर से माय चायस वाली तारिका बोलती हुई सुनाई दी l -जी ,मैंने कहा l -सिर्फ जी से काम नहीं चलने वाला l इसे तुरंत खुद एक्टिवेट करो या किसी से करवाओ l उन्होंने एकदम स्पष्ट हुक्म प्रसारित किया l हुक्म मैडम जी का था सो तामील तो होनी ही थी l हमने भीतर के साहस बटोर कर पूछ ही लिया –मैडम जी यह तो बता दो स्टिंग के जरिये करोगी क्या ? -वही करुँगी जो सब कर…

अब तक पैंतालीस ......

उनके बाईस साल की राजकीय सेवा के दौरान पैंतालीस बार तबादले हो चुके हैं lयहाँ से वहां, विभाग दर विभाग और पद दर पदl इसमें कुछ भी अप्रत्याशित नहीं हैl सेवार्थ नौकरशाह  इधर से उधर आते  जाते रहते  हैंl  उनके इस आवागमन से ही सरकार की पैनी नाक की साख बनती है lएक जगह ठहरा हुआ पानी गंधाने लगता हैlजोचलायमान रहता है उसकी  निर्मलता बरक़रार रहती हैl जनहित में किये गए तबादलों से ही  सरकार की  नेक मंशा और कार्यकुशलता का पता मिलता हैl इससे एक लाभ यह भी होता रहा है कि राजकीय व्यय पर नौकरशाहों को हवा और पानी बदलते रहने का लगातार अवसर मिलता  हैl यह सर्वविदित है कि हवा पानी में बदलाव से सेहत सुधरती हैl कुशल प्रशासन के लिए प्रशासकों का चुस्त- दुरुस्त रहना कितना जरूरी  है ,यह बात किसी से छुपी नहीं हैl
सरकारी तंत्र में तबादले वीरता प्रदर्शन के लिए किसी रणबहादुर को मिले तमगों  की तरह होते हैंl ये तमगे किसी शिकारी के घर के ड्राइंगरूम की दीवार पर टंगी उसके द्वारा मारे गए जानवरों की खाल की तरह होते हैं  ,जिससे उसके अदम्य साहस और आखेट  कौशल का पता मिलता हैl जिस नौकरशाह के  पास जितने अधिक ट्रांसफर आॅडर वह उतना अधिक …

क्रिकेटर की शादी और स्टाइल

क्रिकेटर जी की शादी हो रही है l एक और क्रिकेटर जी भी शादी करने की फ़िराक में इश्क के स्लॉग ओवर्स खेल रहे हैं l  चहुँ ओर  मंगल गीत बज रहे हैं l ढोलकें थपक  रही हैं l टप्पे गाये जा रहे हैं l मझीरे छनक रहे हैं l मेहँदी की रस्म हो रही है l सेलिब्रिटी दुल्हे दुल्हन  के विवाह स्थल के  इर्दगिर्द काली पोषाक पहने बाउंसर समूह मंडरा रहा है  l  मीडिया के रणबांकुरों के हाथ कैमरे के जरिये कुछ  अभूतपूर्व कर गुजरने के लिए कुलबुला रहे हैं l बाउंसरों की मासपेशियां उन्हें रोकने के लिए फड़क रही हैं l स्टूडियो में बैठा एंकर न्यूज़ ब्रेक करने में हो रही देरी के चलते अंगुलियों के नाखून कुतर रहा है l यदि फुटेज  पहुँचने में कुछ और देर हुई तो संभव है कि वह पैर के नाखूनों तक को कतरने के लिए नेलकटर का काम मुहँ के दांतों से ही करने लगे  l यह बात सही है कि किसी  के लिए भी विवाह करना बड़ी बात होती है l इससे भी बड़ी यह बात होती है जब वह क्रिकेट के जरिये नाम और दाम कमाता हुआ प्रसद्धि के नभ में नामजद होता है l और इससे भी अधिक बहुत बड़ी बात तब घटित होती है जब वह विवाह करता हुआ खुल्लमखुल्ला छुपम -छुपाई का खेल खेलता है l मीडिय…