मानसून और सूखता हुआ अचार ,,,,


श्रीमानजी ने दफ्तर से लौट कर घर में घुसते ही खबर दी कि मानसून अब वाकई  आ पहुंचा है |नाऊ इट इज़ आफिशियल ।यह सुनते ही मैडमजी चिहुंकी - तुम्हें कैसे पता  ? यह कह कर उन्होंने आंगन में सूखने के लिए रखे अचार बनाने के लिए कटे हुई आम की फांखों की ओर देखा फिर आसमान को निहारा ।
मुझे फेसबुक से पता लगा ।उन्होंने बताया ।
ये मुए फेसबुक वाले जब देखो तभी अफवाह उड़ाते रहते हैं ।तुम दफ्तर में काम करते हो या फेसबुक पर लटके  रहते हो ? मैडम जी के भीतर से  बॉस की आवाज़  आई  ।
श्रीमान जी ने मामला जटिल होते देख चुप्पी साध ली ।उन्होंने जीवन के तल्ख़ तजुर्बे से सीखा है कि बॉस जब सवाल  करे तो खामोश हो जाओ   ।मैडम जी और बॉस एक ही थैली के चट्टे बट्टे होते हैं ।उनसे तर्क वितर्क करना  व्यर्थ  है ।
मैडम जी के मन में चिंता के बादल उमड़ने घुमड़ने लगे ।वह टीवी पर सास बहू के  अनवरत द्वंद्व का सीरियल देखते हुए भी अपनी तीसरी आँख  मानसून  पर टिकाये रहीं  ।उन्हें मानसून के आने की पदचाप अनचाहे मेहमान के आ धमकने की सूचना जैसी लग रही थी । श्रीमान जी ने  ‘आये रे बदरा’ टाइप कोई भूलाबिसरा गीत गुनगुनाया  तो उन्हें वह  उस खलनायक जैसे लगे  जो किसी अबला को देख कर अट्टहास करे  ।
मौसम में उमस है  ।मैडम जी का मोबाइल एप बता रहा है पूरी सत्तर  प्रतिशत आद्रता है ।उन्हें पता है कि ऐसे में अचार के आम सूखने से रहे ।फिर भी उन्हें उम्मीद है कि मौसम विभाग के सारे आंकड़ो को धता बता कर घंटे दो घंटे को कड़कती धूप निकल ही आयेगी ।भगवान इंद्र अचार विरोधी थोड़े हैं  ।मैडम जी ने गुहार लगाई –हे इंद्र देवता मेरे अचार की लाज रखना ।एकाध दिन बाद बरस लेना ।
मानसून आ चुका है लेकिन जैसा की कायदा है कि बारिश उसके साथ बारिश भी आये ,लेकिन वह नहीं आ रही है ।आसमान सुरमई बादलों से पटा है ।कभी कभी बिजली भी कौंधती सी लगती है ।बादलों की गुर्राहट दिल को कंपा देती है ।फिर क्षणांश में बादलों की सघन परत के किसी कोने से धूप चमक जाती तो उनकी बांछे खिल जाती ।उन्हें यकीन होने लगता कि भगवान कृपालु हैं और वे कलयुग में भी अचार बनाने में संलिप्त मैडमों की प्रार्थनाओं का संज्ञान लेना भूले नहीं हैं ।
 धूप का नटखट छौना अभी तक सूखते हुए अचार के आमों पर फुदक रहा है ।मैडम जी राहत की  सांस लेती उसके सिरहाने  बैठीं लाड़ उसे  निहार रही हैं जैसे   उन्होंने मैटरनिटी होम में अपने बेटे को जन्म के तुरंत बाद निहारा था ।उन्होंने ऐहतियातन एक बेंत को समीप रख छोड़ा है ताकि यदि मेघों के बरसने का दुस्साहस किया तो वह उसे भी  किसी दुष्ट कौए की तरह दुत्कार कर  उड़ा देंगी 
मैडम जी घर के आंगन में अपने  अचार के खातिर मौसम के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में लगी थीं कि उन्हें श्रीमान जी के टेर सुनाई दी ,काले मेघा पानी दे ,पानी दे ,गुड़धानी दे ।यह सुनते ही वह बिफर उठीं ,मेघ तुम्हें कुछ भी दे दें लेकिन अचार नहीं दे सकते ।क्योंकि अचार बनाना मेघों को आता  नहीं ।
मैडम जी के तेवर देख कर मानसून ने तय किया है कि वह अब तभी आएगा जब मुल्क भर की  तमाम मैडमों के अचार के आम ठीक से सूख जायेंगे ।

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