जीवन तो मंगल पर ही है ,,,,,


आओ मेरे मुल्क के फोटोशॉप वीरों ,अपनी मेधा से कल्पना का ऐसा आभासी छौंक लगाओ कि मंगल पर मल्टीप्लेक्स और स्काईक्रेपर्स के  जंगल और रियलस्टेट के लाभप्रद धंधे का श्रीगणेश हो जाये ।याद रहे जीवन मंगल पर ही है धरती पर तो बस यह दिखता भर  है
हम मंगल पर सबसे पहले जा पहुंचे । कुछ काम हमेशा बड़ी सफाई से सर्वप्रथम कर लेते हैं । हमारे मुल्क में नलों में पीने का साफ पानी पहुंचे न पहुंचे उसे पहुँचाने का श्रेय लेकर सरकारी विज्ञापन समय पूर्व पहुँच जाते हैं ।मरते हुए मरीज के पास एम्बुलेंस और उचित चिकित्सा मिलने  से पूर्व ही उसके पास गेट वैल सून का ऑटो जेनरेटिड एसएमएस पहुंच जाता है । भूखे के पास दाल रोटी पहुँचने से पहले डकार लेने की नीमहकीमी तजवीज़ पहुँच जाती है ।गंदगी बुहारने से पहले झाड़ू की गुणवत्ता और उसके मंतव्य पर राष्ट्रव्यापी विमर्श शुरू हो जाता है ।किताब छप कर बाजार में आने से पहले उसकी चौर्यगाथा सार्वजनिक हो जाती है ।विवाह के फेरे होने से पहले होने वाले बच्चों को लेकर जनसंख्या के आंकड़ों पर लोग सवालिया निशान लगाने लगते हैं ।हर मामले में सबसे पहले होने के बावजूद हम सशंकित रहते  हैं ।
अब पूरे मुल्क के पास यक्ष प्रश्न यह पैदा हो गया है कि मंगल पर मंगलयान को वहां जीवन के निशान मिले या नहीं ।कहीं ऐसा न हो कि हम वहां सबसे पहले पहुँचने के बाद भी जीवन को पाने से चूक जाएँ ।गोलपोस्ट के एन मुहाने पर जाकर स्टार सेंटर फॉरवर्ड  गोल  दागने से रह जाये और कोई सिखतड़ खिलाड़ी गोल दाग ले  ।हम वहां से आई तस्वीरों की वीडियो देखते दिखाते रह जाएँ और कोई यूट्यूबबहादुर  वहां स्थापित कल्लन पतंगबाज की कदीमी दुकान का वीडियो अपलोड करके उसे वाइरल कर दे ।दिलदार कबाब वाला अपने लजीज कवाब का वहां विज्ञापन पट टांग दे ।भज्जी के ढाबे की दाल मक्खनी की गमक की न्यूज कोई चैनल ब्रेक कर दे ।हो सकता है कि हम वैज्ञानिक उपलब्धि पर जश्न मनाते रह जाएँ और ‘मेक इन इंडिया’ वाले बाज़ार पर कोई मंगलमय प्रोडक्ट लॉन्च करके वाहवाही लूट ले जाएँ ।
हम युगों युगों से हर काम सबसे पहले करते आये हैं ।जीरो से लेकर आकाश मार्ग पर फर्राटा भरने की तकनीक और टेलीविजन से लेकर समुद्र पर सेतु बनाने तक के काम सबसे पहले हमने किये लेकिन उनका श्रेय अन्य देशों के विज्ञानी ले उड़े ।हम ‘हमने किया हमने किया’ का कोरस गाते और अन्तोगत्वा पछताते रह गए ।हमारा पूरा इतिहास ही मन मसोसने ,हाथ मलने और पछताने की अनवरत गाथा है । इसलिए हमें यह मंगलकारी मौका किसी हालत में गंवाना नहीं है ।जल्दी से जल्दी हमें मंगल ग्रह को पवनसुत का नाम दे देना चाहिए ताकि आगे चल कर कम से कम हनुमान जी का नाम और हमारा  काम दुनिया को याद रहे ।वैसे भी आज के समय में कर्म के बजाय नाम महत्वपूर्ण होता है।सरकार की कलगी में उपलब्धियों के ताज़ा फूल टंकते रहें तो उसकी महक बरक़रार रहती है।
इस बार हमें चूकना नहीं है ।इतने मंगल गीत गढ़ने और गाने हैं कि मुल्क के बच्चे बच्चे को वह ‘ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार’ की तरह सहज कंठस्थ हो जाएँ ।वैसे भी यह वक्त गाने के पिंगल शास्त्रीय विवेचन का नहीं उसकी लाउड उद्घोषणा और ऊँची पिच पर बजाने का है ।वहां हमें अधिक विज्ञान सम्मत गवेषणा में समय बरबाद करने के स्थान पर जीवन के चिन्ह उपलब्ध होने के डिजिटल साक्ष्य दुनिया को  उपलब्ध कराने हैं  ।

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