बड़ी योजनाबद्ध नीति

योजना आयोग अब नीति बनाएगा और इसी नाम से जाना और पुकारा जायेगा  lएक तरीके से देखा जाये तो यह निर्णय नीतिगत रूप में ठीक  है  lबिना नीति के बनी हुई कोई योजना होती है भला ! जैसे हलुआ खाने की नीयत हो ,खिलाने वाले की योजना हो लेकिन ऐसा कुछ खाने खिलाने की नीति न हो तब सब कुछ नियति की मुंडेर पर जा टिकता है   l
हर सरकार के पास प्रत्येक  मसले  का हल तय करने के लिए बेहतरीन मुंडेर होती हैं lउनकी सार्वकालिक और सार्वभौमिक नीति होती है कि नीति बनाओ ,बनवाओ,गाल बजाओ और योजनाबद्ध तरीके से विकास के एजेंडे को दरकिनार करते हुए आगे बढ़ जाओ  l कार्यशील सरकारें सदैव इतनी व्यस्त रहती हैं कि वे किसी मुंडेर पर बैठकर नहीं बतियाती  lबतकही का काम सरकारी वेतनभोगी कारिंदों का है  lयही काम उन पर सर्वाधिक फबता  है  l
कारिंदे अपनी –अपनी आरामदायक रिवाल्विंग चेयरनुमा मुंडेरों  पर पसरे नीति - अनीति जैसे गूढ़ विषय पर गूगल सर्च के जरिये माथापच्ची में लगे हैं  lउनके पास करने लायक बस यही काम बचा है  l इसे वे पूरी मुस्तैदी से कर रहे हैं  lउनके पास  विमर्श के सिवा कोई योजना नहीं है  lयोजना बनाने का काम उन्होंने ऊपर वाले के हाथों में न जाने कब से सौंप रखा  है  l योजना बनती थी  तो उसके कार्यान्वयन के लिए काम करना पड़ता था   lकाम जब किया जाता है तो जाहिर है उसमें गलती हो जाने की आशंका बनी रहती थी   l जब काम ही नहीं है  तो उसमें कैसी भूलचूक  lनो वर्क नो मिस्टेक  l
अब योजना यह है कि कोई योजना नहीं है बस नीति है  lयह बात चूँकि ऊपर से तय हुई है इसलिए इस पर प्रश्नचिन्ह लगाने की कोई पॉलिसी नहीं है  l ऊपर से सिर्फ हुक्म आते हैं उसको नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता क्योंकि उसके पास बेआवाज़ लाठी होती है  lकारोबारी दुनिया का शाश्वत सत्य दो सूत्री होता है  lपहला सूत्र –बॉस से आलवेज़ राईट  l दूसरा सूत्र – पहला सूत्र ही अटल सत्य है  l
नीति कभी सम्पूर्ण सत्य नहीं होती  lवह बेहद फ्लेक्सिबल होती है  lउसका लचीलापन ही उसे हर अंधड में बचाए रहता है  l इसीलिए वह बड़े काम की होती है  lतने हुए पेड़ तेज हवाओं में गिर जाते हैं लचीली झाडियाँ जस की तस बनी रहती हैं  lनीतियां बदलती रहती हैं  lहरदम बदलने को तैयार रहती हैं  lनीति  अर्धसत्य जैसी होती हैं  lवह हो भी सकती है और नहीं भी हो सकती  l
योजना की विदाई हो गई  l उसकी  फेयरवेल पार्टी भी नहीं हो पाई कि नीति के आगमन की खुशी में बंदनवार बंध गए  lस्वागतगान गाये जाने लगे  lनई नेमप्लेट सज गई  lअब तक हाथ पर हाथ धरे कारिंदे बिजी हो गए हैं  lउनके कांधे पर नीति के ढोहने का गुरुतर दायित्य आ गया  lवे एक बार फिर सत्ता  की गुरुत्वाकर्षण शक्ति की जद में आ गए हैं  lउनकी खोयी हुई हनक वापिस आ गई है  lनीति आई तो दफ्तर की चहलपहल वापस लौट आई  lफाइलों पर जमी धूल वातावरण में उड़ती हुई अपने मुक्कदर पर इतराने लगी  l
नीति आई है तो उसके साथ स्वादिष्ट योजना भी वैसे ही आएँगी जैसे समोसे के साथ लाल मिर्च , हरे धनिये की चटनी  आती है  l या चटनी खाने पर  बाबाजी की किरपा आती है l
मानना पड़ेगा योजना की जगह नीति बेहद योजनाबद्ध तरीके से आई है  !




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