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निर्मल गुप्त की अंखियन सुनी
आँखे केवल ताकाझांकी नहीं करतीं वे अनकही को सुनती भी हैं .
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मार्च 10, 2015
होली का आना जाना और मनाना ,,,,
मार्च 10, 2015
यह भक्ति है, सब जानते हैं
मार्च 07, 2015
गुल्लक और मेज की बजटीय समझदारी
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अयन प्रकाशन से प्रकाशित मेरा व्यंग्य संकलन
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मार्च 03, 2015
आप (की) होली तो शुरू होली
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उनका असाधारण अवकाश पर जाना
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आप और दूर की कौड़ी
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फ़रवरी 10, 2015
जीरो ऑवर में अटकी दिल्ली
फ़रवरी 03, 2015
हैंगर पर टंगा एंगर
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