चलो अच्छा हुआ जो गर्मी आ गई



लो आ गई गर्मीजबकि लग यह रहा था कि इस बार यह आएगी नहीं सर्दी के मौसम के बाद डायरेक्ट बरसात आ जायेगी  गर्मी नेताई आश्वासनों की तरह आते -आते अपना आगमन स्थगित कर देगी  हालाँकि इस बात पर कुछेक घनघोर आशावादियों के सिवा किसी को यकीन नहीं थाबर्फ की चुस्की बेचने वाले से लेकर एसी बनाने वाली कम्पनी के सीईओ तक और कूलर की पैडिंग घास बेचने वाले का धंधा करने वाले से लेकर आइसक्रीम पार्लर के सेल्समैन तक  सबको पता था कि गर्मी यदि यहाँ नहीं आएगी तो जायेगी कहाँ उसे तो हर हाल में आना ही होगा
मौसम कोई भी हो कभी स्थिर नहीं रहताएक आता तो दूसरा जाता हैठीक वैसे ही जैसे लोकतंत्र में एक सरकार आती तो दूसरी जाती हैकभी कभार एक सरकार चली जाती है पर उसका स्थान लेने में दूसरी सरकार ठिठक जाती हैऐसे में हॉर्स ट्रेडिंग वालों की बन आती है  छंटे हुए प्रतिनिधि तब घोड़ों में तब्दील हो जाते हैंउनमें से कुछ अरबी घोड़े बन कर मुहँमांगे दाम मिल  जाने  का ख्वाब देखते हैंकुछ खच्चर बन पाते हैं पर बिक वे भी जाते हैं ठीकठाक दाम पर राजनीति घोड़े खच्चर और गधे में भेद नहीं करती जो सहजता से मिले उसे स्वीकार करती जाती है
गर्मी के मौसम को लेकर सबकी अपनी -अपनी चिंता रहती है वह आती  तो बच्चों के लिए छुट्टियाँ लाती है  समर कैम्प के नाम पर शहरी बच्चों के लिए गुलगपाड़ा करने के मुरादों भरे दिन आते हैं  हॉबी क्लास के नाम पर कुकरी से लेकर स्केटिंग और स्विमिंग के ठंडे जल के ताल में मटरगश्ती करने की उम्मीद जगती है बैरोमीटर की निरंतर चढती सुईं को निहारते हुए मौसम विज्ञानी बनने की चाह उत्पन्न होती है  च ....च ...च ....भोत  गर्मी है’, करते हुए घर के भीतर दुबके रहने की वजह मिलती है
गर्मी अपने आगमन को बार -बार टालती जा रही थी तो सारे मुल्क को लग रहा था कि वे प्लेटफार्म पर बैठे हैं और पब्लिक एड्रेस सिस्टम से बार -बार कहा जा रहा है कि गर्मी की  ट्रेन अपने निर्धारित समय से विलम्ब से चल रही हैवह कब आएगी इसका कुछ पता नहीं  आपको हुई असुविधा के लिए हमें खेद हैखेदज्ञापित करने वाला उसे  प्रकट करने के तुरंत बाद  अन्य जानकारी ऐसे देने लगता है जैसे यह जो हो रहा है ,ऐसा तो होता ही है  जनता बरसों से ऐसी सूचनाएँ सुनती आई है वह परेशान होने के बावजूद विचलित नहीं होती  वह किसी से कोई सवाल नहीं करतीवह कोई प्रश्न इसलिए भी नहीं उठाती क्योंकि आकशवाणी करने का अधिकार और मैकेनिज्म रखने वाले लोगों के पास केवल मुहँ होता है ,श्रवण के लिए कान नहीं होते जनता और सरकार के बीच संवाद का रास्ता अक्सर वनवे होता है  यहाँ संवाद नहीं एकालाप चलता है
गर्मी चूँकि आ चुकी है इसलिए राजनीति के वातानुकूलित गलियारों में गहमागहमी बढ़ गई हैंनेताओं के लिए यही वक्त है कि वह बिजली ,पानी ,बीमारी, मच्छर, गरीबी ,कुपोषण आदि के मुद्दे उठायेंवे इन मसलों पर गहन विमर्श में उलझे हैं उनके सामने कम समय में अधिक काम करने की विकट चुनौती है  उन्हें ऐसे तमाम मामलो का समाधान तलाशने के लिए दुनिया भर में स्टडी टूर पर जाना है जाने से पहले ऐसे यात्रा कार्यक्रमों को सरकार से स्वीकृत कराना है
गर्मी आ गई चलो अच्छा हुआ वरना  चुस्की ,एसी ,कूलर की घास, समर कैम्प ,स्विमिंग पूलों और गर्मीवादी चिंतकों का क्या होता  


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