ऊपरवाले का अम्मा दिवस


अम्मा को ऊपर वाले ने आज़ाद कर दिया । अब यह  कन्फर्म हो गया   कि वह  बड़ा कृपालु है ।उसके यहाँ देर तो है पर अंधेर बिलकुल नहीं । उसके यहाँ न्याय का लट्टू फ्यूज उड़ जाने के बाद भी रसूख के इन्वर्टर  से जगमगाता रहता है ।जब किसी  भक्त पर आपदा आती  है तब वह द्रुतगति कार्यवाही करता है ।उसके काम करने का अंदाज़  कुछ ऐसा है जैसे किसी दफ्तर के बाबू की नथुनों  में अच्छे समय की आहट पाकर  दफ्तरों की संबंधित फ़ाइल हिरन की तरह एक मेज से दूसरी मेज पर  लांघती कुलांचे भरने लगती है ।
ऊपर वाले की माया अपरम्पार है ।उसकी मर्जी पर कोई सवालिया निशान नहीं लगा सकता ।वह तुरत फुरत दूध का दूध और पानी का पानी कर देता है ।जिसका एक मतलब यह भी है कि उसके पास अत्याधुनिक मिल्क सेपरेटर होता है जो  दूध में से क्रीम पलक झपकते निकाल लेता है और पर दूध फिर भी बरकरार  रहता है ।उसे पता है कि इहलोक में जिसको जो मिलता है उसके प्रारब्ध के अनुसार मिलता है ।क्रीमी लेयर वालों को  उत्तम क्वालिटी की क्रीम मिलती है । अम्मा पर ऊपरवाले ने रहम करके नीचे वालों पर महती अनुकम्पा की ।वह जेल जातीं तो उनके गम में न जाने कितने भावावेश के चलते  असमय काल कवलित हो जाते ।तय सीमा से अधिक लोग ऊपर पहुंचते तो बैकुंठ में लम्बी लम्बी कतरे लग जातीं ।चहुँ ओर अव्यवस्था हो जाती । वहां आपाधापी के चलते समर स्पेशल ट्रेन जैसा नजारा हो जाता ।स्लीपर क्लास वाले  एसी फर्स्ट पर काबिज हो जाते ।एसी थर्ड वाले सेकिंड में और बेचारे एसी सेकिंड वाले ट्रेन में लगी शिकायत पेटिका में अपनी कम्पलेंट डाल कर अपने मुक्कदर को कोसते जनरल कम्पार्टमेंट के फर्श पर यहाँ वहां टिक पाते ।लोगों के मन में नाहक धारणा बनती कि ऊपर और नीचे में तो उन्नीस –बीस का भी फर्क नहीं है ।ऐसे में उसे अम्मा को बाइज्जत बरी करना ही था वरना उसकी अपनी छवि के दागदार हो जाने का खतरा था ।
कायदे से उसे अम्मा को मदर्स –डे के दिन रिहाई देनी थी ।पर नीचे रहने वालों ने माँ को लेकर सोशल मीडिया समेत पूरे मुल्क में  इतना हुड़दंग मचा रखा था  कि समस्त देवियाँ इतनी भावुक हो उठीं कि उन्होंने उस दिन न तो खुद कोई काम किया न अपने देवताओं को कुछ करने का मौका दिया ।वे आकाश में बैठीं निरंतर नीचे धरती पर झांकती रही और अपना स्तुतिगान सुनती रहीं ।उनके हाथ तब तक आशीर्वाद की मुद्रा में बने रहे जब तक ऐसा करना असम्भव नहीं हो गया ।देवताओं को पता था कि आज धरती पर इस कदर मदर्स डे मनाया जा रहा कि श्रवण कुमार के कंधे पर रखी बेंगी डगमगाने लगी है ।वे उसकी बेंगी का संतुलन बनाने में लगे रहे और नीचे वालों का पूरा दिन बीत गया ।
तब ऊपर वाले ने सोचा कि चलो अम्मा को सजा के खतरे से निजात देकर नीचे वालों का सहृदयता का सन्देश दिया जाये ।मदर्स –डे बीतने के बाद अम्मा दिवस  को जरा हट कर मना लिया जाये ।


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