थैंक्यू इंद्र देवता,तुसी ग्रेट हो जी !


बारिश आ गईl बिन गरजे बादल बरस गए l धरती तरबतर हुई l इससे फिर यह साबित हुआ कि बरसने के लिए गरजने की जरूरत नहीं पड़ती लेकिन बरसने के साथ गरजते भी रहें तो मामला एकदम चकाचक हो जाता है l  जिस तरह जिया के झूमने भर से सावन आ जाता है उसी तरह कभी कभी कागजी नाविकों की फरमाइश पर गली मोहल्ले की नालियां पानी से भर जाती हैं l यह पानीदार वक्त है l जिनके घरों की  छतें वाटरप्रूफ हैं ,उनके लिए छज्जे पर खड़े होकर बरखा की फुहारों का मज़ा लेने का मौसम हैl
बारिश में बतरस और ताकाझांकी के लिए उत्तम मौका होता है l बालकनी में बैठ कर,इधर उधर नजर फिराते हुए अतीत के सुनहरे पलों का पुनर्पाठ हो सकता है l यदि हरी मिर्च की चरपरी पकौड़ी गर्म चाय के साथ उपलब्ध हो तो देश दुनिया के मुद्दों पर विमर्श किया जा सकता है l यदि प्याज़ के पकौड़े मिल जाएँ तो व्यापम घोटाले पर चर्चा और उनके साथ हरी चटनी मिले तो ग्रीस के मुद्रा संकट पर बहस  की जा सकती है l  बरसाती स्नैक्स  के मैन्यू के हिसाब से चिंतन  का आकार प्रकार बदलता रहता है l पकौड़ियों की मिकदार और क्वालिटी के हिसाब से विमर्श का एजेंडा तय होता है l
बरसात आई है तो खूँटी पर टंगे छाते की याद साथ लाई हैl हालंकि छाता  आदमी को भीगने से बचाता  तो नहीं पर बचाव का  भरम जरूर पैदा करता हैl छाता जितना रंगीन होगा उससे उत्पन्न भ्रम उतना ही अधिक नयनाभिराम होगा l कुछ होने से अधिक उसके होने का वहम महत्वपूर्ण होता है l मेंढक गायब हो चुके हैं लेकिन उनकी याद किसी को नहीं आती क्योंकि उनके हिस्से की टरटर बौद्धिक कर लेते हैंl मेंढक के मुकाबले उसकी  टर्राहट बड़ी चीज है,चाहे वह जिस तरीके से आये l
अरसे से लोग कहते आये हैं कि बरसात के रातदिन  बड़े रूमानी होते है l होते होंगेl रुमानियत मौसमी होती है l वह हवा के प्रवाह ,दबाव ,तापक्रम और आद्रता के अनुरूप प्रकट होती है lकभी कभी सब कुछ होते हुए भी नहीं होती  और कभी बेवजह भी सामने आ जाती है l रुमानियत  तभी कारगर लगती  है जब वह आफिशियल हो और , उसका प्रचार प्रसार प्रमोशन सलीके से किया जाये l कार्यकुशल सरकारें हर मौके को एक इवेंट में बदल देने में निपुण होती हैं l वह इतनी विनम्र होती हैं कि हर अच्छी बात का श्रेय  खुद नहीं लेती l मसलन अच्छे मानसून की वजह से महंगाई घटने की उम्मीद को उसने भगवान  के खाते में क्रेडिट कर दिया हैl धार्मिकता की यही तो खूबी है कि वह हर बात को इधर या उधर सरका देती है l
इस बार बरसात आई है तो मौसम विज्ञानियों की कमजोर मानसून की भविष्यवाणी को ठेंगा दिखाते हुई आई हैl ऐसे में सरकार की बन आई हैl वह शीघ्र ही मुल्क भर के अख़बारों में इश्तेहार देकर कहेगी :थैंक्यू इंद्र देवता ,तुसी ग्रेट हो जी l
तरक्की पसंद सरकारें कृतज्ञता ज्ञापन में कभी नहीं चूकतींl




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