ऑनलाइन गंगाजल और डिजिटल आस्था


छन छन कर खबरें आ रही थीं कि अब गंगाजल ऑनलाइन बिकेगा।अब खबर कन्फर्म हुई कि हाँ जी ,बाकायदा ऑनलाइन बुक भी होगा और कैश ऑन डिलीवरी पर मिलेगा भी।अभी यह नहीं पता कि नापसंद होने पर वापस भी होगा या नहीं।लोगों का अनुमान है कि गंगाजल में हमारी युगीन आस्था जुड़ी है इसलिए इसकी कोई रिटर्न पॉलिसी नहीं होगी।आस्थाएं लहंगे ,चुनरी और नाईट वियर की तरह उसी प्रकार वापस नहीं की जा सकेगी  जैसे खा लेने के बाद रबड़ी और पी लेने के बाद छाछ।रबड़ी खा लेने के बाद मिठास दीघ्रजीवी होती है और छाछ पीने के बाद पेट की ठंडक कालजयी।इसी तरह गंगाजल की पवित्रता सदा बरक़रार रहती है।
अब गंगाजल घर घर आएगा ठीक उसी तरह आएगा जैसे आरती भजन पूजा सामग्री आदि कूरियर से मंगाई जाती हैं।अभी यह नहीं पता कि जल किस ब्राण्ड का होगा।भागीरथ ब्राण्ड का या किसी राजनेता के खानदानी नाम का।तमाम तरह के खनिजों,विटामिनों और आशीर्वाद से भरापूरा।या वह वाला गंगाजल बिकेगा,जिसके बारे में राम तेरी गंगा मैली फिल्म ने भ्रामक अफवाहें फैला रखी है।सम्भव है कि समस्त प्रकार के पापों को धो देने की गारंटी वाले डिटर्जेंटयुक्त जल की आपूर्ति की जाए।हो सकता है कि ऐसा चुल्लू भर डिब्बाबंद पानी  भेजा जाए, जिसमें डूब मरने की मुहावरे वाली सुविधा सहज ही उपलब्ध हो।कौन जाने?
गंगाजल सरलता से  उपलब्ध होगा तो जिन्दगी कितनी निष्कलुष हो जायेगी।चाहे- अनचाहे ,समय-असमय कभी भी अनाचार टाइप कुछ किया और फट से गंगाजल अपने  ऊपर छिडक लिया।किसी पतित (या पतिता) का सान्निध्य हुआ तो  एंटी सेप्टिक गंगाजल से  रगड़ रगड़ कर हाथ पाँव धो लिए और हो गये निष्पाप। एंटी सेप्टिक लिक्विड से केवल शरीर धुलता है और इससे तन के साथ मन का अपराध बोध भी धुल जायेगा।।जाहिर है कि वो लोग जो तपाक से हाथ मिलाने के लिए एहतियातन जेब में सेनेटाईज़र स्प्रे लिए फिरते ते हैं वे तब गंगाजल से अपना काम चला सकेंगे।
यह तो तय है कि गंगाजल जब बिकेगा तो खूब बिकेगा।जाहिर है कि जब बिकेगा तो एक न एक दिन इसकी किल्लत भी होगी।इसलिए अभी से  ही यह पता करना पड़ेगा कि गंगाजल किस –किस मुल्क से इम्पोर्ट किया जा सकता है।इसके कारखाने स्थापित करने के लिए किन किन मुल्कों से एफडीआई  मिल सकती है।जब अरहर की दाल मोजाम्बीक में मिल सकती है तो यकीनन गंगाजल भी तंजानिया या ऐसे ही किसी दीगर मुल्क में सस्ते दामों पर मिल ही जाएगा।जब तक आयात की नौबत आये तब तक निर्यात तो इसका हो ही सकता है।वह दिन दूर नहीं चीन में बना गंगाजल सब जगह बिकने ही लगेगा।
वैसे गंगाजल यदि  डिजिटल फॉर्मेट भी ऑनलाइन मिलने लगे तो क्या कहने।विकल्प तो आस्थाओं के भी होते ही होंगे।दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि कोई भी विचार या वस्तु तभी ग्लोबल होती है जब उसका डिजिटल स्वरुप उपलब्ध हो जाता है।


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