धप्प से आया बाज़ार


अखबार आ गया।रबर के छल्ले में लिपटा हुआ।वह ‘धप्प’ की आवाज़ के साथ बॉलकनी में गिरा।मुझे पता  था कि उसमें देश दुनिया की तमाम खबरें होंगी।इंटरनेट और टीवी न्यूज़ चैनलों की सूचना क्रांति के बावजूद हर तरह के समाचारों के लिए अख़बार पर हमारा आदिम यकीन बरक़रार है।युगीन विश्वास इतनी जल्दी खत्म नहीं होते।कहा जाता है कि आइन्स्टीन की पढने की मेज पर घोड़े की नाल सजती थी।हमारे मुल्क में विदेश से चिकित्सा विज्ञान में परास्नातक की डिग्री लिए डाक्टर के क्लीनिक की चौखट पर हरीमिर्च और नीबू लटकते हैं।विज्ञान और ढकोसले सदा मजे से साथ -साथ रहते आये हैं।बीएमडब्लू के साथ तांगा खींचता मरियल घोड़ा बिना हीनभावना के साथ दुलकी चाल से चलता है।
छोटे बड़े शहरों के ऊपरी मंजिल पर रहने वालों के लिए सुबह अमूमन बॉलकनी से होकर धप्प की आवाज़ के साथ ही आती है।शहरों के अधिकांश मुर्गों को पता है कि उनकी हैसियत अब दाल से बदतर हो चली है। वह बांग देना अकसर भूलते जाते हैं।वैसे भी दाल के भाव आसमान छूने के साथ उनकी जान पहले से अधिक झंझट में जा फंसी है।सहमाहुआ मुर्गा हो या आदमी अपने काम से काम रखता है।
उस दिन भी धप्प से अख़बार आया।मैं क्रिकेट के स्लिप के खिलाड़ी की तरह डाइव मारकर उसे लपकने के लिए लपका। कैच छूट गया।वो तो छूटना ही था।गेंद हो या अख़बार जब तक हवा में रहते हैं, कोई आवाज़ नहीं करते। गिरते हैं तो धप्प करते हैं।तब दर्शक या पाठक के मुहं से निकलता है –ओह। मैंने अखबार हाथ में थामा तो तुरंत कह उठा –अहा। अहा इसलिए क्योंकि फ्रंटपेज पर खबर नहीं किसी ऑनलाइन पोर्टल का दीवाली बोनान्जा का विज्ञापन सजा था।तरह तरह के इलेक्ट्रानिक उपकरणों की नयनाभिराम तस्वीरों और अविश्वसनीय ऑफर के साथ। मुझे पता था कि नीचे कहीं कंडीशंस एप्लाई शब्द जरूर  दुबका होगा।
इस बीच मैंने इंडेकशन स्टोव पर चाय का पानी रखा। अख़बार का पन्ना उलटा। वहां बाज़ार पसरा था। बत्तीस जीबी के मैमोरी कार्ड से लेकर पावर बैंक और लेडीज नाईट वियर से लेकर लेपटॉप तक सब कुछ वहां था।उसमें खूब खरीददारी करके दीपावली को ढंग  से सेलिब्रेट करने की बात की गयी थी।इसी तरह आगे के पेज थ्री और पेज फोर पर कोई न कोई अपना सामान लिए बैठा दिखाई दिया। सबके पास मेगा सेल थी।रिबेट का प्रलोभन था।लक्ष्मी गणेश जी हर जगह नेपथ्य में मुस्कराते दिख रहे थे।मुझे लगा बाज़ार ने पर्व मनाने की नयी तकनीक दे दी है।हो सकता है अब दिवाली के दिये पावर बैक से जलें।लेपटॉप पर लक्ष्मी जी की आरती हो।बिकनी पहन कर त्यौहार का जश्न मने।मैमोरी कार्ड में ऐतिहासिक उमंग सलीके से सहेजी जाए।
पेज पांच पर जब तक मैं पहुंचा तो चाय का पानी उबलने लगा। मैंने झटपट चाय की पत्ती चीनी दूध डाला। अख़बार पर नजर डाली तो वहां खबरें मौजूद थीं।बेहद लज्जित सी।अपने में सिकुड़ी हुई ।उनको भी लग रहा होगा कि अब हमारी यही औकात रह गयी है।बाज़ार बड़ों बड़ों की दुर्गति कर देता है।इस बीच चाय भगोने से बाहर उबलने को थी कि मैंने लपक के इंडेकशन ऑफ किया।
चाय का सिप लेते हुए खबर पढनी शुरू की।किसी विकास योजना के उद्घाटन की बासी खबर मिली।किसी मंत्री द्वारा अपने भाषण में की गयी साहित्य संस्कृति की मौलिक मीमांसा दिखी।किस रंग और प्रजाति का कुत्ता घर में पालना मुफीद होगा, ऐसी एडवाइजरी टाइप  अंतराष्ट्रीय खबर पढ़ने को मिली।
मैं समझ गया कि अब आने वाले दिनों में सुबह की धमाकेदार शुरुआत विभिन्न विज्ञापनों के जरिये आने वाले मेगा ऑफर के जरिये ही होनी है।बाज़ार बड़ी मुश्किल से खबरों के लिए स्पेस छोड़ेगा।

   


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