टीवी स्क्रीन का अँधेरा और मुक्तिबोध का ब्रह्मराक्षस


उस दिन टीवी स्क्रीन पर अँधेरा छा गया।मन अतीत की बचकाना कंदराओं में जा पहुंचा। सीधे हाथ की दो उँगलियाँ मुंह के भीतर जाने की विकल आतुरता से भर उठीं।जी हुआ कि जोर से सीटी बजाई जाए। तभी नेपथ्य से आवाज़ उभरी कि आपके टीवी में कोई तकनीकी खराबी नहीं है। पुराना समय होता और थियेटर में चल रही फिल्म के अधबीच ऐसा घटित होता तो तमाम दर्शक बायलोजिकल असम्भव गालियों से पूरे सिनेमा हॉल को गुंजा देते। घर में रखे टीवी के साथ ऐसा रसरंजन और सुविधा कहाँ?
आजकल मुल्क में विमर्श के स्तर पर घटाटोप अंधकार छाया है। एक अँधेरे पर कालिमा की अनेक परतें हैं। भिन्न –भिन्न शेड्स का कालापन। हर शेड का अपना निहितार्थ।व्यवसायिक समझदारी से भरे अर्द्धसत्यो को प्रकट करने का कौशल।टीवी से डिबेट के लिए बीज रोपे जाते हैं।गर्मागर्म बहस के अंकुर फूटते  हैं। बयान बहादुर तरह तरह के सवाल उठाते हैं।होली वाला हुडदंग ‘बिफोर टाइम’ आ धमकता  है। यह बात तय है कि इस बार रंगोत्सव अबीर से नहीं द्रोह और भक्ति के शाश्वत सवालों के जरिये मनेगा।
टीवी वाला अँधेरा फिल्म वाले अँधेरे से भिन्न  है। चैनल वाला  घुप्प अँधेरा बड़ा शातिर और वाचाल है। फ़िल्मी अँधेरा ज़रा रोमांटिक टाइप का हुआ करता था। नायक नायिका अंतरंग दृश्य में करीब आते  कि अँधेरा दबे पाँव घिर आता। आलिंगनबद्ध होते कि दर्शकों और सनसनी के बीच से धडधडाती हुई रेलगाड़ी गुजरने लगती। अधरों में जुम्बिश होती तो किसी फूल पर भौंरा आ बैठता । बिना कुछ दिखे ही सब कुछ दिख जाता। लोग अनुमान आधारित  अजब उत्तेजना से भर उठते। दैहिक प्यार अभिव्यक्त हो जाता और सनातन शालीनता भी अक्षुण बनी रह जाती।  
रंगीन टीवी का अँधेरा वास्तव में अपनी कमीज को दूसरों की कमीज से अधिक उजला दिखाने की कवायद है।अपने समय के सच से मुंह छुपा कर दूसरों की टोपी को किसी शैतान बच्चे द्वारा कांटे में अटका कर उछालने जैसा अर्वाचीन होलियाना उपक्रम।यह अँधेरा साधारण अँधियारा नहीं है। यह तमाम सरोकारों से भरपूर वैसी ही कालिमा है जैसे तेज रोशनी से उपजने वाला आँखों को चौंधिया देने वाला प्रकाश।
अँधेरे में भाव भंगिमाएँ गायब हो जाती हैं। आवाजें बनी रहती हैं।बिना चेहरे वाले स्वर बड़ा आश्वस्त करते हैं।कनपटी धधकने लगती है।मुक्तिबोध वाला ब्रह्मराक्षस घिस रहा है देह, हाथ के पंजे बराबर,बाँह-छाती-मुँह छपाछप, खूब करते साफ,फिर भी मैल,फिर भी मैल!

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